मशीन घण्टा दर पद्धति
(Machine Hour Rate Method)


मशीन घण्टा दर का आशय किसी मशीन की प्रति घण्टा संचालन लागत से है। दूसरे शब्दों में, किसी निश्चित अवधि में प्रयोग में आने वाली मशीन के संचालन व्ययों को उस अवधि में मशीन के प्रयोग होने वाले घण्टो से भाग देकर जो राशि ज्ञात होती है, उसे मशीन घण्टा दर कहते हैं। 

व्याख्या की दृष्टि से एक अवधि में जो कारखाना उपरिव्य्य होते है, उनको अलग अलग मद के अनुसार कारखाने को सभी मशीनों पर, उपयुक्त आधार पर, वितरित किया जाता है। इस प्रकार प्रत्येक मशीन के हिस्से में कारखाने के उपरिव्य्य आ जाते है।



मशीन घण्टा दर पद्धति क्या है - Machine Hour Rate Method in Hindi
मशीन घण्टा दर पद्धति क्या है - Machine Hour Rate Method in Hindi



मशीन घण्टा दर ज्ञात करने के घटक व विधि
(Factors and process of machine hour rate)


1) एक निश्चित अवधि के कारखाना उपरिव्य्यो को प्रत्येक मद के अनुसार विभिन्न मशीनों पर अभिभाजित कर लिया जाता है। 


2) कभी कभी प्रत्येक मशीन को एक इकाई मान लिया जाता है। कभी कभी मशीनों के एक समूह को इकाई मान लिया जाता है जबकि छोटी छोटी मशीने बहुत सी होती है और ये आपस मे एक दूसरे की पूरक होती है। इस दशा में उपरिव्य्य का अभिभाजन मशीनों के विभिन्न समूहों को इकाई मानकर होता है। 



3) प्रत्येक मशीन के कार्य करने के घण्टे वर्ष भर के लिए अनुमान से पहले ही निश्चित कर लिए जाते है। 


4) यदि प्रति मशीन के सम्पूर्ण उपरिव्य्यो के योग को उस मशीन के अनुमानित कार्यशील घण्टो से विभाजित कर दिया जाता है तो मशीन की प्रति घण्टा दर निकल आती है। 


5) किसी उपरिव्य्य या वस्तु का उपरिव्य्य ज्ञात करने के लिए जितने घण्टे मशीन ने उस उपकार्य पर काम किया है उन घण्टो को मशीन घण्टा दर से गुना कर दिया जाता है। 


6) यदि एक उपकार्य को पूरा करने के लिए कई मशीनों ने कार्य किया है तो प्रत्येक मशीन के द्वारा कार्य करने के घण्टे ज्ञात कर लिए जाते है और प्रत्येक मशीन के घण्टो को उसी मशीन की घण्टा दर से गुणा करके कुछ उपरिव्य्य ज्ञात कर लिया जाता है जो उस उपकार्य कर पड़ेगा। 



मशीन घण्टा दर पद्धति के गुण
(Merits and demerits of machine hour rate method)


1) मशीनों का अधिक प्रयोग होने पर वैज्ञानिक पद्धति - जिन उपक्रमो में उत्पादन प्रक्रिया में मशीनों का प्रयोग अधिक होता है, वहां कारखाना उपरिव्य्यो के बंटवारे एवं निर्धारण की दृष्टि से यह पद्धति एक वैज्ञानिक पद्धति है। 


2) स्थायी एवं परिवर्तनशील व्ययों में विभाजन - मशीन घण्टा दर की गणना में कारखाना उपरिव्य्यो को स्थायी एवं परिवर्तनशील व्ययों में विभाजित किया जाता है।


3) मशीनों की कार्यकुशलता का मापन - इस पद्धति द्वारा मशीनों की सापेक्षिक कार्यकुशलता मापी जा सकती है तथा विभिन्न मशीनों की उपयोग लागत का ज्ञान हो जाता है। 


4) लागत के अनुमान में सहायक - यदि पद्धति उत्पादन लागत का अनुमान लगाने तथा मानकों के निर्धारण में सहायक होती है। 


5) मशीनों पर व्यय की जानकारी - इस व्यवस्था में प्रत्येक मशीन पर व्ययों का अलग एवं विस्तृत विवरण रखा जाता है अतः प्रत्येक मशीन पर होने वाले व्ययों की पूरी जानकारी सम्भव है। 


मशीन घण्टा दर पद्धति के दोष
(demerits of machine hour rate method) 


1) श्रम प्रधान प्रक्रिया में अनुपयुक्त - यह पद्धति ऐसी उपक्रमो में उपयुक्त नही रहती, जहां अधिकांश कार्य श्रम प्रधान प्रक्रिया पर आधारित होता है। 


2) अधिक गणितीय कार्य - इस गणना में लिपिकीय एवं गणितीय कार्य बढ़ जाता है। 


3) अनेक व्ययों के अभिभाजन में कठिनाई - कारखाना उपरिव्य्य की सभी मदें मशीनों से सम्बंधित नही होती, फिर भी मशीन घण्टा दर की गणना के लिए उनका सम्बन्ध खींचतान करके मशीनों से बैठाया जाता है, जैसे भवन का किराया, स्टोर के व्यय, भवन ह्रास, फर्नीचर ह्रास, कारखाना स्टेशनरी, टेलीफोन इत्यादि के व्यय। 


4) विभिन्न प्रकार की मशीनों की समस्या - यदि उत्पादन में विभिन्न प्रकार एवं आकार की मशीनों का प्रयोग होता है तो समस्या यह आती है कि सभी मशीनों के लिए एक ही मशीन घण्टा दर प्रयोग में नही आ सकती। 

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