सवोट: वातावरण विश्लेषण की एक तकनीक
(SWOT as a Technique of Environment Analysis)



सवोट विश्लेषण किसी व्यवसाय द्वारा अपने आंतरिक व बाह्य वातावरण को समझने के लिए किया गया विश्लेषण है। सवोट विश्लेषण का प्रयोग प्रभावी संगठनात्मक रणनीतियां तैयार करने में किया जाता है। सवोट विश्लेषण करने वाली इकाई अपने संगठन की शक्तियों व दुर्लभताओ का, बाहरी वातावरण में विद्यमान अवसरों तथा चुनोतियो के साथ अध्यन कर सकती है। सवोट विश्लेषण, व्यवसाय को प्राप्त अवसरों का अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करके अपनी क्षमताओं का अधिक प्रयोग करना सिखाता है। दूसरी और यह विश्लेषण व्यवसाय को अपनी दुर्लभताओ को कम करके वातावरण की चुनोतियो का सामना करने में मदद करता है। सवोट विश्लेषण के द्वारा अपनी दुर्लभताओ का पता लगाया जाता है तथा इन्हें कम करके वातावरण की चुनोतियो के हानिकारक प्रभावों से बचाया जा सकता है।


SWOT as a Technique of Environment Analysis
SWOT as a Technique of Environment Analysis



एक व्यावसायिक इकाई, तकनीकी शमटोज़ वित्तीय संसाधनों, विपणन क्षमताओं और उत्पादन सुविधाओ के सम्बन्ध में प्रभावी या दुर्बल हो सकती है। आगे बढ़ने के लिए व्यवसाय को अपनी शक्तियों का सर्वोत्तम प्रयोग करना चाहिए तथा अपनी दुर्लभताओ को कम करने का प्रयत्न करना चाहिए। अवसर और चुनोतियाँ बाहरी वातावरण से सम्बंधित होती है। वातावरण बहुत से अवसर प्रदान करता है। कुछ इकाइयो के पास इन अवसरों का लाभ उठाने की क्षमता नही होती जबकि कुछ अन्य इकाइयो के पास वातावरण द्वारा दिये गए अवसरों का लाभ उठाने की पर्याप्त क्षमता होती है। इसी तरह वातावरण में होने वाले परिवर्तन हमारे लिए चुनोती भी पैदा कर सकते है।


सवोट के तत्व (components or SWOT)


1) शक्तियां - एक संगठन की शक्तियों का तातपर्य उसके अंदर पहले से विद्यमान उन तत्वों से है जिनके कारण वह अपने उत्पादन प्रतिद्वंदी के ऊपर लाभ ले सकता है। उदहारण के लिए अछि अनुसन्धान व विकास सुविधाएं किसी व्यवसाय की शक्ति है इससे नए उत्पादों को विकसित किया जा सकता है और व्यावसायिक इकाई को प्रतियोगी इकाइयो से आगे ले जाया जा सकता है। अर्थात अपनी शक्ति की मदद से एक व्यावसायिक इकाई प्रतियोगिता का सामना आसानी से कर सकती है।


2) दुर्लबताये - व्यावसायिक इकाई के अंदर विद्यमान सीमाएं ही उसकी दुर्लबताये है। ये दुर्लबताये व्यवसाय को अपने प्रतिद्वंदी के समक्ष कमजोर बना देती है। उदहारण के लिए किसी व्यावसायिक इकाई को कुल विक्रय का अधिकतर हिस्सा एक ही उत्पाद श्रंखला से प्राप्त होना, अप्रचलित तकनीक का प्रयोग, वित्तीय साधनों की कमी, उत्पादों की क्वालिटी का अच्छा न होना आदि उसके लिए दुर्लबताये हो सकती है। ऐसा होने से किसी संकट में उस इकाई को हानि उठानी पड़ सकती है। 


3) अवसर - व्यवसाय के वातावरण में अनुकूल परिस्थितियों की विद्यमानता ही अवसर कहलाती है। यदि व्यावसायिक इकाई के पास अवसरों का लाभ उठाने की पर्याप्त शक्ति है तो ये अवसर उसके लाभ को बढयँगे। 


4) चुनोतियाँ - वातावरण के उपस्थित विपरीत परिस्थितियां ही व्यवसाय के लिए समस्याए है। वातावरण में उपस्थित ये चुनोतियाँ संगठन के लिए जोखिम पैदा करती है। यह चुनोती बढ़ती प्रतियोगिता कर रूप में, फैशन में परिवर्तन के कारण, सरकारी नीतियों में परिवर्तन के कारण, कच्चे माल की कमी इत्यादि के कारण हो सकती है। 

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