पार्षद अंतर्नियम क्या है इसके विशेषताएं और महत्व के बारे में जानकारी 


हेलो दोस्तों। 

आज के पोस्ट में हम पार्षद अंतर्नियम और इसकी विशेषताओ और महत्व के बारे के बात करेंगे। 


पार्षद अंतर्नियम (Articles of Association)

पार्षद अंतर्नियम दूसरा महत्वपूर्ण प्रलेख है जो प्रवर्तकों द्वारा तैयार किया जाता है। और कंपनी के समामेलन के उद्देश्य से रजिस्ट्रार के समक्ष अन्य प्रलेखों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। कंपनी के पार्षद अन्तर्नियमो का निर्माण कंपनी अधिनियम तथा पार्षद सीमानियम की व्यवस्थाओं के अंतर्गत किया जाता है। यह पार्षद सीमानियम का सहायक प्रलेख है। कंपनी के पार्षद अंतर्नियम, कंपनी के आंतरिक नियम है, जो पार्षद सीमानियम के सहायक भी कहे जा सकते है। 

पार्षद अंतर्नियम सरल शब्दों में - पार्षद अन्तर्नियम एक ऐसा प्रलेख है जो कंपनी के सदस्यों के बीच पारस्परिक अधिकारों तथा उस रीति का नियमन करता है जिसके अनुसार कंपनी का व्यवसाय चलाया जायेगा। 



पार्षद अंतर्नियम क्या है इसके विशेषताएं और महत्व के बारे में जानकारी
पार्षद अंतर्नियम क्या है इसके विशेषताएं और महत्व के बारे में जानकारी




अंतर्नियम की विशेषताएं (Features of Articles of Association)

1. पार्षद अंतर्नियम कंपनी के समामेलन के अधीन होते है। 

2. अंतर्नियम एक सार्वजनिक प्रलेख है जिसका रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन होता है।

3. अंतर्नियम कंपनी के आंतरिक नियम होते है तथा अंशधारियो के हित के लिए होते है। 

4. अंतर्नियम सदस्यों के आपसी अधिकारों से सम्बंधित होते है। 

5. अन्तर्नियम अफसरों के कर्तव्यों, अधिकारों तथा शक्तियों को स्पष्ट करते है। 

6. ये व्यापार के संचालन को नियंत्रित तथा नियमित करते है।

7. इनमे कंपनी की आवश्यकताओं के अनुसार परिवर्तन किए जा सकते है, इसलिए ये परिवर्तनशील है। 

8. इनमे कंपनी के उद्देश्यो को प्राप्त करने के लिए सम्बन्धित साधनों तथा रीतियों का वर्णन होता है। 

9. अन्तर्नियम कंपनी तथा सदस्यों के पारस्परिक अधिकारों तथा इनके बीच पारस्परिक समझौते का कार्य करते है। 




पार्षद अन्तर्नियम का महत्व (Importance of Articles of Association)

पार्षद अंतर्नियम पार्षद सीमानियम के सहायक माने जाते है। पार्षद अन्तर्नियमो का प्रमुख उद्देश्य कंपनी के आंतरिक प्रबन्ध को नियंत्रित करना तथा कंपनी के अधिकारों को परिभाषित करता है। पार्षद अन्तर्नियमो का महत्व पार्षद सीमानियम के संदर्भ में आंका जाता है। इस प्रलेख का महत्व और भी बहुत कारणों से अच्छी तरह स्पष्ट होता है जो इस प्रकार है-


1. अंतर्नियम में उन नियमों व उपनियमों का उल्लेख किया जाता है जो कंपनी के उद्देश्यो को कार्य रूप देने में सहायक होते है अतः अंतर्नियम कंपनी के दैनिक प्रशासन की बाधाओं को दूर करने के सहायता करता है।


2. अंतर्नियम कंपनी के अधिकारियों तथा अंशधारियो के बीच मे सम्बन्ध स्थापित करता है। प्रत्येक सदस्य प्रत्येक सदस्य कंपनी को और कंपनी प्रत्येक सदस्य को इन्हें मानने के लिए बाध्य कर सकती है। कंपनी का एक सदस्य दूसरे सदस्य को भी इन्हें मानने के लिए कानूनी रूप से विवश कर सकता है। 


3. कंपनी के साथ अनुबंध करने वाले बाहरी व्यक्तियों को अन्तर्नियमो का ज्ञान होना चाहिए। अन्तर्नियमो का उल्लंघन होने पर वह अनुबंध को लागू नही करा सकता है। यदि अनुबंध करने के समय उसे अन्तर्नियमो के उल्लंघन का ज्ञान न हो तो अनुबंध को लागू कराया जा सकता है।


4. कंपनी कुछ कार्यो को तभी कर सकती है जबकि अन्तर्नियमो में उनको करने का अधिकार दिया गया हो : जैसे अंशो का अपहरण करना। इस प्रकार कंपनी के अंतर्नियम कंपनी के कार्यो का नियम भी करते है।


कंपनी के अंतर्नियम इसके सीमानियम के सहायक माने जाते है और इसमें उल्लेखित उद्देश्यो की प्राप्ति के लिए भिन्न भिन्न नियमो की व्याख्या करते है। इसके फलस्वरूप, ये सीमानियम की शर्तों व व्यवस्थाओं के प्रतिकूल नही हो सकते। 


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