संचालक के बारे में जानकारी


हेलो दोस्तों। 

आज के पोस्ट में हम संचालक के बारे में बात करेंगे।


संचालक (Director)

एक कंपनी केवल राजनियम के अधीन निर्मित एक व्यक्ति है। वह एक कृत्रिम व्यक्ति है, प्राकृतिक व्यक्ति नही। इसलिए वह अपने कार्यों को अपने एजेंटों या अपने द्वारा नियुक्त किये गए व्यक्तियों के द्वारा ही निष्पादित कर सकती है। जिन व्यक्तियों के द्वारा वह अपने कार्यों को निष्पादित करती है उन्हें संचालक कहते है। 



संचालक के बारे में जानकारी
संचालक के बारे में जानकारी



संचालको की योग्यताएं (Qualifications of Directors)

कंपनी अधिनियम के संचालक के लिए कोई शैक्षणिक या अंशो के धारण सम्बन्धी कोई योग्यता निर्धारित नही की गई है। ऐसा एक भ्रम प्रचलित है कि संचालक कंपनी का अंशधारी होना ही चाहिए। परन्तु ऐसी बात नही है। जब तक कि अन्तर्नियमो में कोई अन्य व्यवस्था नही हो, एक संचालक का कंपनी का अंशधारी होना अनिवार्य नही है। लेकिन अन्तर्नियमो के प्रायः संचालको के योग्यता अंशो की व्यवस्था की जाती है। अतः कंपनी का संचालक बनने से सम्बंधित नियम निम्न प्रकार है। 


कोई भी व्यक्ति एक सार्वजनिक कंपनी का, जिसमे अंशपुंजी है, संचालक नियुक्त होने के योग्य नही होगा जब तक कि-

(i) उसे संचालक पहचान संख्या आबंटित नही की गई है। 

(ii) उसने अपनी नियुक्ति के 30 दिन के भीतर संचालक के रूप में कार्य करने की अपनी लिखित एवं हस्ताक्षरित सहमति निर्धारित तरीके से कंपनी के रजिस्ट्रार को सुप्रदनाही कर दी है। 


(iii) उसने कंपनी से योग्यता अंश लेने व उसके लिए भुगतान करने के लिए पार्षद सीमानियम पर हस्ताक्षर नही कर दिए है। 

(iv) उसने कंपनी में योग्यता अंश यदि कोई है, लेने तथा उनका मूल्य चुकाने के लिखित दायित्व रजिस्ट्रार के पास भेज दिया गया है। 

(v) उसने रजिस्ट्रार के पास ऐसा शपथ पत्र भेज दिया गया हो की उसके योग्यता अंश उसके नाम मे रजिस्टर्ड है। केवल एक व्यक्ति ही संचालक नियुक्त किया जा सकता है। 



संचालको की अयोग्यताएँ (Disqualifications of Directors)


कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 164 में कुछ ऐसी व्यवस्थाओं का उल्लेख है जिनके कारण किसी व्यक्ति को किसी कंपनी का संचालक नियुक्त नही किया जा सकता है। अन्य शब्दो मे, निम्नलिखित व्यक्ति किसी कंपनी के संचालक पद पर नियुक्त किये जाने के अयोग्य है :

(i) यदि किसी उचित न्यायालय ने उसे अस्वस्थ मस्तिष्क का या पागल घोषित कर दिया हो और यह निर्णय अभी लागू हो। 

(ii) एक ऐसा दिवालिया जिसे मुक्ति प्राप्त नही हुई हो। 

(iii) एक ऐसा व्यक्ति जिसने दिवालिया घोषित किये जाने के लिए आवेदन पत्र दिया हो और उसका आवेदन पत्र विचाराधीन हो। 

(iv) यदि उसे किसी न्यायालय द्वारा नैतिक दोष के अभियोग में कम से कम 6 महीने की सजा दी गयी हो और इस सजा को समाप्त हुई अभी 5 वर्ष न हुए हो। 

(v) यदि उसने ऐसे अंशो की याचना की राशि का भुगतान न किया हो जिनका वह धारी है और याचना के भुगतान की अंतिम तिथि समाप्त हुई 6 महीने बीत गए हो। 

(vi) यदि किसी न्यायालय या न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश में उसे संचालक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है तथा ऐसा आदेश अभी लागू है। एक स्वत्रंत निजी कंपनी, अपने अन्तर्नियमो द्वारा उपर्युक्त कारणों के अतिरिक्त किसी व्यक्ति के संचालक बनने के लिए अन्य अयोग्यताएँ भी निर्धारित कर सकती है। 

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