हिन्दू अविभाजित परिवार का कर निर्धारण


हेलो दोस्तों।

आज के पोस्ट में हम हिन्दू अविभाजित परिवार के कर निर्धारण के बारे में समझेंगे।


हिन्दू अविभाजित परिवार का कर निर्धारण (Assessment of Hindu Undivided Family)

हिन्दू अविभाजित परिवार स्वत्रन्त्र रूप से एक करदाता है। इस पर परिवार के नाम से व्यक्ति की तरह कर निर्धारण किया जाता है। इसका कर निर्धारण उसके कर्ता (Manager) के द्वारा होता है।



हिन्दू अविभाजित परिवार का कर निर्धारण
हिन्दू अविभाजित परिवार का कर निर्धारण




हिन्दू अविभाजित परिवार के किसी सदस्य को अन्य संस्था से संचालन के रूप में या साझेदार फर्म में विनियोग कर दिया गया हो और H.U.F के किसी सदस्य को उस कंपनी के संचालक या साझेदारी फर्म में साझेदार बना लिया जाए तो उसे संचालक के रूप में या साझेदार के रूप में जो पारिश्रमिक प्राप्त होगा वह उसकी व्यक्तिगत आय भी मानी जा सकती है या H.U.F की आय भी मानी जा सकती है। इस सम्बंध में निर्णय लेने के लिए केवल एक ही आधार है कि क्या यह पारिश्रमिक उसकी व्यक्तिगत सेवाओं के प्रतिफल में है या यह कंपनी या फर्म का केवल एक ढंग है HUF को धन के विनियोग के प्रतिफल में कुछ आय देने का। यदि उस सदस्य को कंपनी का संचालक या फर्म में साझेदार केवल इस कारण से बनाया गया है कि HUF ने धन विनियोग किया है तो उस सदस्य को कंपनी या फर्म से मिली हुई आय HUF की आय मानी जायेगी। यदि यह आय सदस्य द्वारा की गई सेवाओं के बदले में मिली है तो यह उसकी व्यक्तिगत आय होगी।




कुल आय की गणना करने के लिए सकल कुल आय में से दी जाने वाली कटौतियां

एक हिन्दू अविभाजित परिवार अपनी कुल आय की गणना करने के लिए सकल कुल आय में से निम्न धाराओं के अंतर्गत कटौतियां पाने का अधिकारी है :

अधिभार - यदि कुल आय एक करोड़ ₹ से अधिक है @ 10 %


सीमांत राहत - जब कुल आय एक करोड़ ₹ से अधिक है तो कर की राशि अधिभार सहित एक करोड़ ₹ से अधिक आय की राशि पर इस आय से अधिक नही होगी, परंतु शिक्षा उपकर पर सीमांत राहत नही मिलेगी।


शिक्षा उपकर - आयकर एवं अधिभार की राशि पर 3% की दर से शिक्षा उपकर लगेगा।


स्त्रीधन - स्त्रीधन वह सम्पति होती है जो स्त्री को अपने पिता, भाई, पति या अन्य किसी रिश्तेदार से मिली हो। यह उसे चाहे विवाह से पहले मिली हो चाहे बाद में, इससे कोई फर्क नही पड़ता। दायभाग सम्प्रदाय में पति से मिली हुई अचल सम्पति स्त्रीधन में नही आती है। स्त्रीधन से आय न तो परिवार की आय में शामिल होती है न पति की आय में।यह तो स्त्री की पृथक आय मानी जाती है।


अविभाजित सम्पति - यह वह सम्पति होती है जिसे परिवार के सदस्यों में बांटा नही जा सकता है। ऐसी सम्पत्ति में भूमि, भवन, प्रतिभूतियां या आय के अन्य साधन आते है जो किसी पूर्वज द्वारा अपनी Will द्वारा किसी व्यक्ति को धारक बनाती है। प्रायः यह सम्पत्ति परिवार के सबसे ज्येष्ठ ददस्य को मिलती है। इस सम्पत्ति की आय परिवार की आय नही होती है। यह उस सम्पत्ति के धारक की व्यक्तिगत आय होती है और उसके व्यक्तिगत कर निर्धारण में इस आय पर कर लगता है। इस आय में से परिवार के अन्य सदस्यों को जो भाग मिलता है वह उनके हाथ मे पूर्णतया कर मुक्त है।


हिन्दू अविभाजित परिवार के सदस्य को परिवार की प्राप्तियां - धारा 10 (2) के अंतर्गत हिन्दू अविभाजित परिवार के सड्डी को परिवार से जो धनराशि मिलती है वह उसकी कुल आय में नही जोड़ी जाती है, बशर्तें की यह राशि परिवार की आय में से दी गयी हो या अविभाजित सम्पत्ति की दशा में यह राशि परिवार की सम्पत्ति की आय में से दी गयी हो। यह छूट तभी स्वीकार हो सकती है जबकि निम्न शर्ते पूरी हो जाए :

(i) एक हिन्दू अविभाजित परिवार होना

(ii) करदाता का हिन्दू अविभाजित परिवार का सदस्य होना

(iii) यह राशि परिवार के सदस्य होने की हैसियत से मिली हो

(iv) यह राशि परिवार की आय में से दी गयी हो।



हिन्दू अविभाजित परिवार का विभाजन - धारा 171 के अंतर्गत दिए हुए स्पष्टीकरण में विभाजन की परिभाषा दी गयी है, जिसके अनुसार विभाजन का अर्थ निम्न है :

(क) यदि सम्पत्ति का भौतिक विभाजन सम्भव हो तो विभाजन का अर्थ उस सम्पत्ति के भौतिक विभाजन से है, केवल आय का विभाजन करने से परिवार का विभाजन नही माना जाता है।


(ख) यदि सम्पत्ति का भौतिक विभाजन सम्भव न हो तो उतना विभाजन करा देना, जितना सम्भव हो, विभाजन कहलाता है, परन्तु केवल स्थिति का पृथक हो जाना विभाजन नही माना जाता है।


विभाजन के बार कर निर्धारण की विधि - एक अविभाजित हिन्दू परिवार का विभाजन के बाद कर निर्धारण करने के सम्बंध में निम्न प्रावधान है :

(क) जब तक विभाजन कर निर्धारण अधिकारी स्वीकार न कर ले तब तक परिवार पर अविभाजित परिवार की तरह से कर निर्धारण होगा।


(ख) कर निर्धारण के समय यदि परिवार का कोई सदस्य यह कहे कि परिवार का विभाजन हो चुका है तो कर निर्धारण अधिकारी इस सम्बंध में प्रत्येक सदस्य से पूछताछ करेगा। पूछताछ के बाद वह यह निर्णय करेगा कि विभाजन पूर्ण है या आंशिक और यदि ऐसा विभाजन हुआ है तो किस तिथि को हुआ है।



वे आय जो परिवार की आय नही मानी जाती है

1. परिवार के किसी सदस्य द्वारा अपने व्यक्तिगत प्रयत्नों से प्राप्त की गई आय तथा उस सदस्य की पृथक सम्पत्ति से आय। ऐसी आय पर उस सदस्य पर व्यक्ति के रूप में कर निर्धारण होना भले ही उसके पुत्र हो।


2. पति की मृत्यु के बाद पत्नी को एकल स्वामी के रूप में प्राप्त सम्पत्तियों से आय। ऐसी सम्पत्ति से आय पर उसे एक व्यक्ति के रूप में आय कर देना होगा।


3. यदि कोई अपना व्यक्तिगत व्यापार करता है तो ऐसे व्यापार की आय पर एक व्यक्ति के रूप में कर निर्धारण होगा, भले ही उसने परिवार के कोष से ऋण लेकर पूंजी लगाई हो।


4. परिवार के सदस्यों द्वारा व्यक्तिगत रूप से किसी साझेदारी में व्यापार करने से होने वाली आय। यह फर्म की आय मानी जाएगी।


5. अविभाजनीय सम्पत्ति की आय। इस आय पर अविभाजनीय सम्पत्ति के धारक पर व्यक्ति के रूप में कर निर्धारण होगा।


6. परिवार के विभाजन के समय कर्ता की पत्नी को दी गयी राशि तथा अविवाहित पुत्रियों को विवाह के व्यय के लिए दी गयी राशि परिवार की सम्पत्ति में परिवर्तित नही की जा सकती है तथा उससे आय परिवार की आय में शामिल नही की जा सकती है। 

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