राष्ट्रीय आय एवं इसकी विशेषताएं


हेलो दोस्तों।

आज के पोस्ट में हम राष्ट्रीय आय और इसकी विशेषताओं के बारे में जानेंगे।


राष्ट्रीय आय (National Income)

किसी देश मे एक वर्ष में जो अंतिम वस्तुएं तथा सेवाएं उतपन्न होती है उनके बाजार मूल्य के जोड़ को राष्ट्रीय आय कहा जाता है। भारत की राष्ट्रीय आय समिति के अनुसार, राष्ट्रीय आय में बिना दोहरी गिनती के, अर्थव्यवस्था में, एक दी हुई अवधि में उतपन्न की जाने वाली सेवाओं तथा वस्तुओं के मूल्य का माप किया जाता है।




National Income and Features in Hindi
National Income and Features in Hindi





राष्ट्रीय आय की मुख्य विशेषताएं (Main Features of National Income of India)


1. कृषि पर अत्यधिक निर्भरता - भारत की राष्ट्रीय आय मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है और राष्ट्रीय आय का लगभग 13.9 प्रतिशत भाग कृषि से प्राप्त होता है। पर कृषि एक अनिश्चित धंधा है, क्योकि यह अधिकतर वर्षा पर निर्भर करता है जो कि स्वयं अनिश्चित है। यदि कृषि की उन्नति की और विशेष रूप से ध्यान दिया जाए तो यह देश के आर्थिक विकास एवं राष्ट्रीय आय की वृद्धि में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान देती रहेगी।




2. प्रति व्यक्ति आय की कम वृद्धि दर - जनसंख्या की वृद्धि बड़ी तीव्र गति से हो रही है। योजनाकाल में राष्ट्रीय आय की वृद्धि लगभग 5 प्रतिशत की दर से हो रही है। लेकिन जनसँख्या वृद्धि के कारण प्रति व्यक्ति आय वृद्बी दर केवल लगभग 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष है। यदि कारण है कि अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय भारत की प्रति व्यक्ति आय से लगभग 35 गुना अधिक है। इसी तरह जापान की प्रति व्यक्ति आय भारत की प्रति व्यक्ति आय से लगभग 31 गुना अधिक है।


3. राष्ट्रीय आय का असमान वितरण - दुर्भाग्यवश हमारे देश मे राष्ट्रीय आय का वितरण समान नही है। भारत मे उच्चतम 10 प्रतिशत जनसंख्या के पास राष्ट्रीय आय का 31.1 प्रतिशत हिस्सा है तथा न्यूनतम 10 प्रतिशत जनसंख्या के पास राष्ट्रीय आय का मात्र 3.6 प्रतिशत हिस्सा है।


4. राष्ट्रीय आय का अधिकांश भाग खाद्य पदार्थों पर व्यय किया जाता है - केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के मतानुसार 2006 - 07 में भारत की राष्ट्रीय आय का लगभग 50 प्रतिशत भाग खाद्य पदार्थों पर व्यय किया गया था।


5. निम्न जीवन स्तर - भारत की राष्ट्रीय आय का अध्यन इस तथ्य को भी बताता है कि पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय आय बढ़ने पर भी लोगो का जीवन स्तर बहुत कम बढ़ा है। लोगों की मौद्रिक आय तो जरूर ही बढ़ी है पर कीमत स्तर के बढ़ने से वास्तविक आय में अधिक वृद्धि नही हुई।


6. राष्ट्रीय आय की कम विकास दर - राष्ट्रीय आय के अध्ययन से यह बात भी स्पष्ट होती है कि हमारे देश के विकास की दर अन्य देशों की तुलना में बहुत नीची रही है। 1951 सब 2011 तक कि अवधि में राष्ट्रीय आय की औसत वृद्धि दर मात्र 5 प्रतिशत प्रतिवर्ष रही है।


7. शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आय स्तर में अंतर - अखिल भारतीय ग्रामीण परिवार सर्वेक्षण के अनुसार शहरी क्षेत्रों में आय का स्तर ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग दुगुना है और ऐसा होना स्वाभाविक भी है, क्योकि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास कम हुआ है।


8. क्षेत्रीय असमानता - प्रति व्यक्ति आय के अनुमान से पता चलता है कि भारत मे क्षेत्रीय असमानता कम नही हुई। केवल पांच राज्यों की औसत प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से अधिक है, बाकी सब राज्यों की कम है। सबसे अधिक आय गोवा तथा सबसे कम बिहार की है। हरियाणा का दूसरा स्थान, महाराष्ट्र का तीसरा जबकि गुजरात का चौथा स्थान है।


9. संगठित क्षेत्र का बढ़ता योगदान - भारत की राष्ट्रीय आय में संगठित क्षेत्र का योगदान बढ़ रहा है। वर्ष 1980-81 में संगठित क्षेत्र का राष्ट्रीय आय में योगदान 30 प्रतिशत था, वर्ष 2004-05 में यह बढ़कर 42 प्रतिशत हो गया है।


10. टरशयरी क्षेत्र के योगदान में वृद्धि - भारत की राष्ट्रीय आय में योजनाकाल में टरशयरी क्षेत्र में योगदान में निरन्तर वृद्धि हो रही है। सन 1950-51 में टरशयरी क्षेत्र का योगदान 24.5 प्रतिशत था, परन्तु 2011-12 में यह बढ़कर 59 प्रतिशत हो गया। अब हमारी राष्ट्रीय आय में टरशयरी क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक है। 

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