Gordon's Model of dividend policy in hindi


हेलो दोस्तों।

आज के पोस्ट में हम गोर्डन मॉडल के बारे में समझेंगे।


गोर्डन मॉडल (Gordon's Model)

गोर्डन मॉडल भी इस विचारधारा का समर्थन करता है कि कंपनी के लाभांश निर्णय का प्रभाव कंपनी के मूल्य पर पड़ता है अर्थात लाभांश नीति, कंपनी के मूल्य से सम्बंधित है।




मान्यताएं (Assumptions)

गोर्डन मॉडल की मान्यताएं निम्नलिखित है -

1. कंपनी के विनियोगो पर प्रत्याय दर स्थिति रहती है - गोर्डन मॉडल इस मान्यता पर आधारित है कि कंपनी द्वारा किए गए विनियोगो पर प्रत्याय दर स्थित रहती है।



2. कंपनी की पूंजी की लागत स्थिर रहती है - गोर्डन मॉडल यह मानता है कि कंपनी की पूंजी की लागत स्थिर रहती है।




Gordon's Model of dividend policy in hindi
Gordon's Model of dividend policy in hindi




3. कंपनी दर स्थित रहती है - गोर्डन मॉडल इस मान्यता पर आधारित है कि कंपनी की संचय दर एक बार निश्चित होने के बाद स्थिर रहती है इस प्रकार,

g       =     विकास दर    (Growth Rate)

b       =    संचय दर     (retention ration)

c       =    प्रत्याय दर     (rate of return)

इस कारण विकास दर भी स्थिर ही होती है।



4. केवल आंतरिक वित्त - गोर्डन मॉडल की एक अन्य मान्यता यह है कि कंपनी अपनी वित्त सम्बन्धी जरूरतों की पूर्ति केवल आंतरिक वित्त अर्थात संचित आय से ही करती है। कंपनी अपनी वित्त व्यवस्था बाहरी स्त्रोतों से नही करती है।



5. केवल समता पूंजी वाली कंपनी - इस मॉडल की यह मान्यता है कि कंपनी के पूंजी ढांचे में केवल समता अंश पूंजी होती है अर्थात कंपनी के पास कोई ऋण पूंजी नही होती है।



6. असीमित जीवनकाल तथा निश्चित आय - गोर्डन मॉडल इस मान्यता पर आधारित है कि कंपनी का जीवनकाल असीमित है व कंपनी को नियमित रूप से आय प्राप्त होती है।



7. कोई कॉर्पोरेट कर नही - कोई कॉर्पोरेट कर नही होता है।



8. पूंजी की लागत, विकास दर से अधिक होती है - गोर्डन मॉडल की एक अन्य मान्यता यह है कि इसमें यह माना जाता है कि पूंजी की लागत, कंपनी की विकास दर से अधिक है।




निष्कर्ष (Conclusion) - गोर्डन मॉडल की इन सभी मान्यताओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है इस मॉडल के अनुसार -

(i) विनियोगकर्ता एक निश्चित प्रत्याय दर प्राप्त करने के लिए प्रीमियम का भुगतान करने व अनिश्चित प्रत्याय दर के लिए कटौती करने के इक्छुक होते है।


(ii) विनियोगकर्ता जोखिम के प्रति अनिच्छुक होते है।


यहां जोखिम से अभिप्राय विनियोगकर्ता द्वारा किए गए विनियोगो पर इच्छित प्रत्याय दर न मिलने की संभावना से होता है।


विनियोगकर्ता वर्तमान लाभांश प्राप्ति को भविष्य में एक साथ लाभांश प्राप्ति की तुलना में अधिक पसंद करते है। अतः अगर कंपनी आय को संचित करके रखती है तो इससे विनियोगकर्ताओं का जोखिम बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप कंपनी के अंशों का बाजार मूल्य भी घट जाता है।



तर्क (Argument) - गोर्डन मॉडल विचारधारा को स्पष्ट करने के लिए 'A bird in hand is better than two in the bush' तर्क दिया जाता है। इसके अनुसार वर्तमान में कम की प्राप्ति भी भविष्य की अधिक प्राप्ति से बेहतर होती है। इसका कारण भविष्य की अनिश्चितता है। इसलिए विनियोगकर्ता कंपनी के ऐसे अंशों को प्रीमियम पर भी खरीदने के लिए तैयार हो जाते है जिन पर कंपनी वर्तमान में ही लाभांश का भुगतान कर देती है तथा इसके विपरीत ऐसे अंश जिन पर लाभांश का भुगतान संचित करके भविष्य में दिया जाता है विनियोगकर्ता ऐसे अंशों को कटौती पर ही क्रय करने को तैयार होते है। ऐसे अंशों पर कटौती की दर का निर्धारण आय की संचित किए जाने की दर के आधार पर किया जाता है। 

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