लाभांश नीति निर्धारण का महत्व


हेलो दोस्तों।

आज के पोस्ट में हम लाभांश नीति निर्धारण के महत्व के बारे में जानेंगें।


लाभांश नीति निर्धारण का महत्व (Significance of the Determination of Dividend Policy)

प्रबन्ध के वित्तीय निर्णयों में लाभांश नीति निर्धारण सम्बन्धी निर्णय का विशेष महत्व है। वित्तीय प्रबन्ध में निम्नलिखित तीन मुख्य निर्णय लिए जाते है -

(i) विनियोग निर्णय

(ii) वित्त व्यवस्था निर्णय

(iii) लाभांश निर्णय


इन तीन निर्णयों में लाभांश का भी विशेष महत्व होता है।लाभांश निर्णय या लाभांश नीति निर्धारण के मुख्य महत्व का विवरण निम्नलिखित है -


1. तरलता का प्रभाव - लाभांश नीति का प्रभाव कंपनी की तरलता पर पड़ता है। अगर कंपनी लाभांश नीति के अनुसार यह निर्धारित करती है कि शुद्ध लाभों के अधिक भाग अंशधारियों को लाभांश के रूप में वितरित किया जाए तो इससे कंपनी के पास संचित लाभों में कमी हो जाएगी जिसके कारण भविष्य में लाभदायक अवसर उपलब्ध होने पर बाह्य साधनों से वित्त की व्यवस्था करनी पड़ेगी। इसके विपरीत अगर कंपनी लाभांश नीति में यह निश्चित करती है कि लाभांश की तुलना में शुद्ध लाभों का अधिक भाग व्यवसाय में ही संचित किया जाए तो इससे कंपनी की तरलता की स्थिति मजबूत बनती है।



Significance of the Determination of Dividend Policy in Hindi
Significance of the Determination of Dividend Policy in Hindi




2. अंशों के बाजार मूल्य पर प्रभाव - लाभांश नीति निर्धारण का अंशों के बाजार मूल्य के लिए भी बहुत महत्व है। अगर कंपनी नियमितता से एक निश्चित प्रतिशत दर से अंशों पर लाभांश का भुगतान नही करती है तो इससे अंशों के बाजार मूल्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसका कारण यह है कि बाजार में अंशधारियो को लगने लगता है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति अच्छी नही है जिससे कंपनी के अंशों की मांग कम हो जाती है और परिणामस्वरूप अंशों का मूल्य घट जाता है।


3. पूंजी ढाँचे पर प्रभाव - लाभांश नीति निर्धारण का महत्व इसलिए भी है क्योंकि लाभांश नीति का पूंजी ढाँचे पर प्रभाव पड़ता है। अगर कंपनी अधिक लाभांश वितरित करने का निर्णय करती है तो कंपनी के पास संचित लाभों की मात्रा कम रह जाती है जिसके कारण कंपनी को अपने पूंजी ढाँचे में आंतरिक स्त्रोतो या समता पूंजी की अपेक्षा बाहरी स्त्रोतों अर्थात ऋण पूंजी को शामिल करना पड़ता है। इसके विपरीत अगर कंपनी लाभांश कंपनी कम वितरित करके लाभों के अधिक भाग संचित करने का निर्णय लेती है तो इसके परिणामस्वरूप कंपनी अपने पूंजी ढाँचे में बाहरी स्त्रोतों की अपेक्षा आंतरिक स्त्रोतो अर्थात समता पूंजी को अधिक अनुपात में शामिल कर सकती है।


4. कंपनी के विकास पर प्रभाव - लाभांश नीति का प्रभाव कंपनी के विकास पर भी पड़ता है। अगर कंपनी कम दर से तथा अनियमित रूप से लाभांश बांटती है तो इससे कंपनी के अंशों के बाजार मूल्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके साथ साथ कंपनी को बाहरी वित्तीय संस्थाओं से ऋण प्राप्त करने में भी कठिनाई होती है जिसके परिणामस्वरूप कंपनी को पर्याप्त मात्रा में पूंजी उपलब्ध नही हो पाती है और उसका विकास अवरुद्ध हो जाता है।


निष्कर्ष - निष्कर्ष के रूप में लाभांश नीति का निर्धारण पर्याप्त सोच विचार करके ही किया जाना चाहिए क्योंकि इससे कंपनी के महत्वपूर्ण पहलुओ पर प्रभाव पड़ता हैम कंपनी को विवेकपूर्ण तरीके से लाभांश करने व लाभों को संचित करने के अनुपात का निर्धारण करना चाहिए।

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