Removal of Directors in Hindi


हेलो दोस्तों।

आज के पोस्ट में हम संचालकों को हटाया जाने के बारे में बात करेंगे।


संचालकों को हटाया जाना (removal of directors)

1. कंपनी द्वारा हटाया जाना - कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 169 में यह प्रावधान है कि कोई कंपनी किसी ऐसे संचालक को, जो न्यायाधिकरण द्वारा नियुक्त किया गया संचालक नही है, उसकी पदावधि की समाप्ति से पूर्व विशेष सूचना तथा साधारण प्रस्ताव द्वारा हटा सकती है। कंपनी तथा संचालक के बीच कोई ऐसा अनुबन्ध जो साधारण प्रस्ताव द्वारा संचालक हटाये जाने को प्रतिबंधित करता हो, कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध होने व्यर्थ व्यर्थ होगा।




Removal of Directors in Hindi
Removal of Directors in Hindi





विधि (Procedure) :

अगर किसी संचालक को उसका कार्य काल समाप्त होने के पूर्व हटाया जाना है, तो निम्न विधि अपनाई जाती है :

(i) विशेष सूचना - किसी संचालक को हटाने के लिए प्रस्ताव की विशेष सूचना कंपनी को देना जरूरी है। ऐसी सूचना कंपनी की सभा के 14 दिन पूर्व भेजनी चाहिए।


(ii) प्रस्ताव की प्रतिलिपि संचालक को भेजना - इस धारा के अन्तर्गत किसी संचालक को हटाने के प्रस्ताव की सूचना प्राप्त होने के तुरंत बाद, कंपनी को उसकी प्रतिलिपि सम्बन्धित संचालक को भेजनी चाहिए। इस संचालक को कंपनी की सभा मे इस प्रस्ताव पर बोलने का अधिकार है।


(iii) संचालक को स्पष्टीकरण का अधिकार - हटाये जाने वाले संचालक को यह अधिकार भी है कि वह अपना लिखित स्पष्टीकरण कंपनी के पास भेज सके। अगर स्पष्टीकरण के देर से प्राप्त होने के कारण उसकी प्रतिलिपि सदस्यों को न भेजी जा सकी हो तो वह संचालक अपने स्पष्टीकरण को सभा मे पढ़े जाने की मांग कर सकता है।


परन्तु अगर इस स्पष्टीकरण में कोई ऐसा विवरण है, जिसमे किसी सदस्य की मान हानि का प्रश्न है, तो न्यायालय उसके स्पष्टीकरण को अन्य सदस्यों के पास भेजने या सभा मे न पढ़े जाने का आदेश दे सकता है।


रिक्त स्थान को भरना - हटाये जाने वाले संचालक के स्थान पर अन्य संचालक की नियुक्ति उसी सभा मे, जिसमे संचालक को हटाया गया है, विशेष सूचना द्वारा हो सकती है। अगर उस सभा मे इस रिक्त स्थान को नही भरा जाता तो इसे उसी विधि से भरा जाएगा जैसे आकस्मिक रिक्त स्थान को धारा 161 के अधीन भरा जाता है। परन्तु हटाए जाने वाले संचालक को पुनर्नियुक्त नही किया जा सकता है।


हटाये जाने वाले संचालक के स्थान पर नियुक्त किए जाने वाले संचालक का कार्य काल पूर्व संचालक की अवधि तक ही रहेगा।




2. न्यायाधिकरण द्वारा हटाया जाना - अगर राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण की यह राय है की कंपनी के क्रिया कलाप किसी संचालक द्वारा अन्याय व कुप्रबंध वाली रीति से चलाए जा रहे है तो न्यायाधिकरण कंपनी तथा प्रबन्ध संचालक या किसी अन्य संचालक के बीच हुए अनुबन्ध को समाप्त, रद्द या संशोधित कर सकता है।


इस प्रकार हटाए गए व्यक्ति 5 वर्ष की अवधि के लिए किसी भी प्रबन्धकीय पद को ग्रहण करने के अयोग्य हो जाते है। परन्तु केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति से इस अवधि में छूट मिल सकती है। इस प्रकार हटाए गए व्यक्ति को किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति भी नही दी जाती।

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