Resignation by the Director in Hindi 

हेलो दोस्तों। 

आज के पोस्ट में हम संचालकों द्वारा त्याग पत्र देने के बारे में जानेंगे। 

संचालकों द्वारा त्याग पत्र देना (Resignation by the Directors) 

एक संचालक किसी भी समय संचालक पद से त्याग पत्र दे सकता है। अगर संचालक के त्याग पत्र देने के सम्बंध में कंपनी के अन्तर्नियमों में कोई नियम दिए हुए है, तो प्रत्येक संचालक को अपने पद से त्याग पत्र देते समय उन नियमों का पालन करना होगा। अगर अंतर्नियम इस सम्बंध में मौन है तो कोई संचालक कंपनी को लिखित में उचित सूचना देकर किसी भी समय अपना पद त्याग सकेगा। कंपनी ऐसी रीति में, एक समय के भीतर और ऐसे प्रारूप में, जो निर्धारित किया जाए, कंपनी रजिस्ट्रार को सूचित करेगी तथा कंपनी द्वारा आयोजित की गई ठीक पश्चातवर्ती साधारण सभा मे ऐसे पद त्याग के तथ्य को संचालकों की रिपोर्ट में भी प्रस्तुत करेगी। 



Resignation by the Director in Hindi
Resignation by the Director in Hindi 



त्याग पत्र देने वाला संचालक त्यागपत्र देने के विस्तृत कारणों के साथ अपने त्यागपत्र की एक प्रति ऐसी रीति में जो निर्धारित की जाए, त्यागपत्र देने के 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार को भी भेजेगा। 

संचालकों को हटाया जाना

किसी संचालक का त्यागपत्र उस तारीख से प्रभावी होगा जिस तारीख को कंपनी द्वारा सूचना प्राप्त की जाती है या सूचना में संचालक द्वारा निर्दिष्ट तारीख, अगर कोई हो, जो भी बाद में हो। 


जहां किसी कंपनी के सभी संचालकों ने अपने पदों से त्याग पत्र दे दिया है या धारा 167 के अधीन अपने पद रिक्त कर देते है तो वहां प्रवर्तक या उनकी अनुपस्थिति में केंद्रीय सरकार अपेक्षित संख्या में संचालकों को नियुक्त करेगी जो साधारण सभा मे कंपनी द्वारा संचालकों की नियुक्ति किए जाने तक पद धारण करेंगे। 


एक प्रबन्ध संचालक या पूर्णकालिक संचालक केवल मात्र सूचना देकर अपना पद नही त्याग सकता। उनके मामलों में त्यागपत्र की औपचारिक स्वीकृति अनिवार्य है। इसका कारण यह है कि एक प्रबन्ध संचालक या पूर्णकालिक संचालक, दो विभिन्न पदों पर, एक तो संचालक तथा दूसरे कंपनी का मुख्य कर्मचारी अधिकारी अर्थात कंपनी के पूर्णकालिक कर्मचारी की भांति, कार्य करता है। 


एक संचालक जिसका त्यागपत्र बोर्ड ने स्वीकार कर लिया है, कंपनी के अपने द्वारा क्रय किए गए अंशों पर दायित्व को छोड़कर त्यागपत्र की स्वीकृति के बाद उपगत किसी दायित्व के लिए दायीं नही होगा। 



संचालकों द्वारा लाभ का पद या स्थान ग्रहण करना (Ditectors Holding Office or Place of Profit) 

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 188 के अनुसार, बोर्ड के प्रस्ताव द्वारा कंपनी की पूर्व सहमति के बिना : 

(अ) कोई भी कंपनी का संचालक लाभ का पद या स्थान ग्रहण नही करेगा तथा 


(ब) ऐसे संचालक का कोई रिश्तेदार या साझेदार या ऐसी फर्म जिसमे ऐसा संचालक या उसका रिश्तेदार साझेदार हो या ऐसी निजी कंपनी, जिसमे वह संचालक हो, का कोई भी संचालक या प्रबन्धक किसी भी ऐसे लाभ के पद या स्थान को ग्रहण नही कर सकता, जिसका कुल मासिक पारिश्रमिक, जैसा कि निर्धारित किया गया हो। 


इस धारा के अर्थ में 'लाभ का पद या स्थान' से आशय कंपनी में ऐसे पद या स्थान से है जहां ऐसा पद या स्थान किसी संचालक द्वारा धारित किया जाता है अगर उसे धारित करने वाला संचालक कंपनी में उस पारिश्रमिक से अधिक जिसका वह संचालक के रूप में हकदार है, वेतन, फीस, कमीशन, परिलाभ, किराया मुक्त आवास या उनसे अन्यथा पारिश्रमिक के रूप में कोई चीज प्राप्त करता है। 


Post a Comment