Organisation and management of the secondary capital market in hindi


हेलो दोस्तों।

आज के पोस्ट में हम द्वितीयक पूंजी बाजार का संगठन एवं प्रबन्ध के बारे में समझेंगे।


द्वितीयक पूंजी बाजार का संगठन एवं प्रबन्ध (Organisation and management of the secondary capital market)

स्कंध विपन्नी ही एकमात्र एक ऐसा स्थान है जहां प्रतिभूतियों का क्रय विक्रय किया जा सकता है। भारत मे वर्तमान समय मे 23 मान्यता प्राप्त स्कंध विपन्नी कार्यरत है। इनमे से अधिकतर को कंपनी अधिनियम की धारा 25 के अनुसार 'association of persons' के रूप में निर्गमित किया गया है। इनका संगठन पारस्परिकता के रूप में किया जाता है। ये स्कंध विपन्नी कर लाभ तथा अनुपालन सम्बन्धी मामलों में लाभप्रद माने जाते है। एक स्कंध विपन्नी के कार्यक्षेत्र का निर्धारण उसकी मान्यता के साथ किया जाता है।




Organisation and management of the secondary capital market in hindi
Organisation and management of the secondary capital market in hindi




वर्तमान समय मे तीन नए स्कंध विपन्नी स्थापित किए है, जो निम्नलिखित है -

1. Over the counter exchange of india (OTCEI)

2. National stock exchange of india (NSEI)

3. Inter-connected stock exchange of india (ICSE)



वर्तमान समय मे, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने सभी स्कंध विपन्नियों को भारत के किसी भी हिस्से में उनके व्यापारिक केंद्रों को स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस सुविधा के परिणामस्वरूप विभिन्न स्कंध विपन्नियों ने अपने व्यापार का विस्तार देश के विभिन्न भागों में कर लिया है। सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार के कारण बहुत सी स्कंध विपन्नियों के प्लेटफार्म तक इंटरनेट व मोबाइल साधनों द्वारा भी पहुंचना सम्भव हो गया है। इसका लाभ यह है कि आज देश के दूर दूर भागों से निवेशकर्ता अपने घरों में बैठे बैठे स्कंध विपन्नियों में लेन देन कर पा रहे है। इसके अतिरिक्त इस आधुनिक साधनों का प्रचार होने से स्कंध विपन्नी की सभी जानकारियां निवेशकर्ताओं को तुरन्त प्राप्त हो जाती है।



स्कंध विपन्नी की सदस्यता (Membership of a Stock Exchange)

एक स्कंध विपन्नी में केवल दलाल ही प्रतिभूतियों का लेन देन कर सकते है। कोई भी निवेशकर्ता इस स्कंध विपन्नियों में प्रतिभूतियों का क्रय विक्रय इन दलालों के माध्यम से ही कर पाता है। एक निवेशकर्ता किसी दलाल को प्रत्यक्ष रूप से कोई आदेश देता है या अप्रत्यक्ष रूप से किसी उप दलाल के माध्यम से आदेश दिया जाता है। एक दलाल को किसी स्कंध विपन्नी की सदस्यता प्राप्त करने के लिए 'security regulation act, 1956, the securities and exchange board of india, act 1992' के अंतर्गत दिए गए नियमों, उपनियमों, अधिसूचनाओं, परिपत्रों, दिशा निर्देशों आदि का पालन करना अनिवार्य होता है।


स्कंध विपन्नी में प्रतिभूतियों का व्यापार करने के लिए दलाल व उप दलाल को भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड से इस आशय का पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त दलाल व उप दलाल को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा लागू की गई आचार संहिता का भी पालन करना पड़ता है।

अगर स्कंध विपन्नी उचित समझे तो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा तय की गई शर्तों को अपने सदस्यों पर और अधिक कठोरता से लागू कर सकता है।


NSE ने सदस्यता प्रदान करने के लिए SEBI से भी अधिक कठोर शर्तें लागू कर रखी है। इसके अंतर्गत सदस्यों का प्रदेश विभिन्न घटकों पर निर्भर करता है जैसे गत वर्षों का लेखा, अनुभव, शिक्षा, कॉर्पोरेट ढांचा, पूंजी पर्याप्तता आदि। इन सभी घटकों से दलालों व उप दलालों की सेवाओं में और अधिक सुधार आता है।


प्रार्थी या साझेदार या संचालक, किसी को भी स्कंध विपन्नी का चुककर्ता नही होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, SEBI द्वारा इन्हें पूंजी बाजार के साथ मध्यवर्ती से रूप में जुड़े होने के कारण निष्कासित भी न किया गया हो। अतः स्पष्ट है कि प्रार्थी या साझेदार या संचालक प्रतिभूति कारोबार से तो सम्बन्धित होने चाहिए परन्तु पूंजी आधारित गतिविधियों से नही। 

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