Accounting Records in the Books of Partnership Firm in hindi


हेलो दोस्तों।

आज हम साझेदारी फर्म की पुस्तकों में लेखे के बारे में समझेंगे।


साझेदारी फर्म की पुस्तकों में लेखे (Accounting Records in the Books of Partnership Firm)

विक्रय होने वाली साझेदारी फर्म की पुस्तकों में निमांकित खाते बनाए जाते है :

1. वसूली खाता - इस खाते में निमांकित लेखे किए जाते है -

(i) इस खाते के डेबिट पक्ष में वे सब सम्पत्तियां हस्तांतरित की जाती है जिन्हें कंपनी ने क्रय किया है। सम्पत्तियों का हस्तांतरण हमेशा चिट्ठे में दिए हुए मूल्यों पर ही किया जाता है। अगर कंपनी ने सभी सम्पत्तियां ली है तो विक्रेता फर्म के रोकड़ शेष को भी इस खाते के डेबिट में हस्तांतरित किया जाएगा।





Accounting Records in the Books of Partnership Firm in hindi
Accounting Records in the Books of Partnership Firm in hindi





(ii) अगर कंपनी ने कोई सम्पत्ति नही ली है और अगर उस सम्पत्ति को फर्म ने खुद विक्रय कर दिया है तो उसके विक्रय से हुई हानि से वसूली खाते को डेबिट और लाभ से वसूली खाते को क्रेडिट कर दिया जाएगा।


(iii) अगर कोई सम्पत्ति कंपनी से नही ली है और उसे बाजार में विक्रय भी नही किया गया है तो उसे साझेदारों के पूंजी खाते के डेबिट पक्ष में उनकी अंतिम पूंजी के अनुपात में हस्तांतरित कर दिया जाएगा।

साझेदार का दिवालिया होना

(iv) वह लेनदार और बाह्य दायित्व जिन्हें कंपनी ने लिया है वसूली खाते के क्रेडिट में हस्तांतरित किए जाते है और इनके लिए अन्य कोई समायोजन करने की आवश्यकता नही होती है।परंतु वह लेनदार या दायित्व जिन्हें फर्म स्वयं भुगतान करती है उनके लिए वास्तविक भुगतान राशि को दायित्व के खाते में डेबिट कर दिया जाता है और पुस्तक मूल्य और वास्तविक भुगतान राशि के अंतर को वसूली खाते में हस्तांतरित कर दिया जाता है।


(v) जिस राशि के बदले कंपनी फर्म के व्यवसाय को क्रय करती है उसे क्रय मूल्य कहते है। इस राशि से कंपनी के खाते को डेबिट तथा वसूली खाते को क्रेडिट किया जाता है।


(vi) वसूली के गयी अगर विक्रेता फर्म ने किए हो तो उन्हें वसूली खाते के डेबिट में और रोकड़ खाते के क्रेडिट में लिखते है।


(vii) वसूली खाते के लाभ या हानि को साझेदारों के पूंजी खातों में उनके लाभ विभाजन अनुपात में हस्तांतरित कर दिया जाएगा।



2. क्रय करने वाली कंपनी का खाता - इस खाते के डेबिट में क्रय मूल्य लिखा जाता है और कंपनी से प्राप्त रोकड़, अंश तथा ऋणपत्रों को इस खाते के क्रेडिट में लिखते है।



3. पूंजी खाते - इन खातों में पूंजिया, सामान्य संचय, अवितरित लाभ, वसूली खाते का लाभ हानि आदि लिखकर अंतिम पूंजिया ज्ञात कर ली जाती हैं क्रेता कंपनी से प्राप्त किए गए अंशो और ऋणपत्रों को सभी साझेदार इन अंतिम पूँजीयों के अनुपात आपस मे बांट लेते है। साझेदारों की पूँजीयों के अंतिम शेष को रोकड़ द्वारा भुगतान कर दिया जाता है।

इस प्रकार फर्म के सभी खाते बन्द हो जाते है।


क्रेता कंपनी की पुस्तकों में लेखे :

1. क्रय की प्रविष्टि :

Assets                                                                     Dr.
Goodwill (Balancing figure, if any)                      Dr.
      To Liabilities
      To Vendor's A/c (A/c of Partnership firm)
      To Capital Reserve (Balancing figure, if any)

इस प्रविष्टि में क्रय की गई सम्पत्तियों को संशोधित मूल्य से डेबिट किया जाता है। अगर इस प्रविष्टि को क्रेडिट पक्ष का जोड़ अधिक आता है तो अंतर की राशि से डेबिट पक्ष में Goodwill के खाते को डेबिट किया जाता है और इसके विपरीत अगर इस प्रविष्टि का डेबिट पक्ष पहले से अधिक है तो क्रेडिट में Capital Reserve A/c को क्रेडिट किया जाता है।


2. क्रय मूल्य के भुगतान की प्रविष्टि :

Vendor's A/c (A=c of Partnership firm)            Dr.
      To Share Capital (A/c
       To Debentures A/c
       To Bank A/c 

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