अन्तराष्ट्रीय वितरण माध्यम के बारे में जानकारी

हेलो दोस्तों।

इस पोस्ट में हम अन्तराष्ट्रीय वितरण माध्यम के बारे में जानेंगे।


अन्तराष्ट्रीय वितरण माध्यम (International Distribution Channel)

अन्तराष्ट्रीय विपणन में उत्पाद का वितरण बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि चाहे उत्पाद कितना भी अच्छा क्यों न हो। अगर वह उचित समय पर, उचित स्थान तथा उचित मात्रा में, सही उपभोक्ता तक नही पहुंचता तो उसका उसका श्रेष्ठ होना कोई महत्व नही रखता। आधुनिक समय मे विशिष्टीकरण तथा बड़े पैमाने के उत्पादन के कारण बाजार का क्षेत्र काफी विस्तृत होता जा रहा है इसलिए वितरण माध्यमों की महत्वत्ता भी बढ़ती जा रही है। वितरण माध्यम से अभिप्राय उन माध्यमों से है जो उत्पादों को उत्पादन केंद्रों से उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं। वितरण माध्यम उत्पादक तथा उपभोक्ता के बीच कड़ी का काम।करते है।



अन्तराष्ट्रीय वितरण माध्यम के बारे में जानकारी
अन्तराष्ट्रीय वितरण माध्यम के बारे में जानकारी





अन्तराष्ट्रीय विपणन माध्यम की विशेषताएं या प्रकृति (Characteristics or Nature of International Distribution Channels)

अन्तराष्ट्रीय वितरण माध्यम की विशेषताएं इस प्रकार है :

1. मध्यस्थों में केवल उन्हीं को शामिल किया जाता है जो उत्पादों तथा सेवाओं के स्वामित्व का हस्तांतरण करते है।


2. वितरण माध्यम उत्पादों या सेवाओं की वितरण प्रक्रिया में संलग्न व्यक्तियों एव संस्थाओं का समूह है।

वितरण माध्यम के चुनाव को प्रभावित करने वाले तत्व जाने

3. वितरण माध्यम के अन्तर्गत मध्यस्थ उत्पादों के स्वामित्व हस्तांतरण के साथ-साथ अन्य कई कार्यों की पूर्ति करते है।


4. वितरण माध्यम के अन्तर्गत कार्य कर रहे मध्यस्थों को पारिश्रमिक कमीशन के रूप में मिलता है जबकि फुटकर विक्रेताओं को पारिश्रमिक लाभ के रूप में मिलता है।

वितरण माध्यम के प्रकार


5. वितरण माध्यम उत्पादों तथा सेवाओं के प्रवाह को सुनिश्चित करते हैं।



वितरण माध्यम के संघर्ष (Conflicts in Channel of Distribution)

वितरण माध्यम के संघर्ष का यथार्थ कारण संस्थागत परिवर्तन है। यह परिवर्तन बाजार मांग के बदलते हुए स्वभाव और आर्थिक प्रगति एवं संस्थाओं के मध्य प्रतिस्पर्धात्मक क्रिया के द्वारा उतपन्न होता है। वितरण माध्यम के मुख्यतः दो प्रकार के प्रतिस्पर्धात्मक संघर्ष पाए जाते है जो इस प्रकार है :

1. क्षैतिज स्तर पर प्रतिस्पर्धा - वितरण के क्षैतिज स्तर पर दो प्रकार के प्रतिस्पर्धात्मक संघर्ष पाए जाते है एक समान प्रकार के दो मध्यस्थों में प्रतियोगिता तथा विभिन्न प्रकार के मध्यस्थों में प्रतियोगिता। ये प्रतिस्पर्धात्मक संघर्ष व्यापार के लिए समस्या उतपन्न करते है। जब कोई मध्यस्थ अपने उत्पाद में ऐसी नई पंक्तियाँ जोड़ता है जिसमे की उसी वर्ग की संस्थाओं द्वारा व्यवहार की परंपरा नही है, तब उस वर्ग के अन्य मध्यस्थों को यह बात अच्छी नही लगती और वे उसका विरोध करते है। अपरम्परागत उत्पाद पंक्तियाँ जोड़ने के लिए प्रेरणा निम्न तीन सामान्य स्त्रोतों में आ सकती है (i) बाजार द्वारा प्रेरणा, (ii) निर्माता द्वारा प्रेरणा तथा (iii) मध्यस्थ द्वारा प्रेरणा।

वितरण माध्यम के कार्य

2. लम्बवत स्तर पर प्रतियोगिता - इस प्रकार की प्रतियोगिता फुटकर तथा व्यवसायियों के बीच, निर्माता तथा व्यवसायी के बीच या निर्माता तथा फुटकर विक्रेताओं के बीच पाई जाती है। जजव फुटकर विक्रेताओं द्वारा कुछ औद्योगिक प्रयोक्ताओं को विक्रय करना थोक व्यवसायियों के विरोध का कारण बन सकता है। इसी प्रकार, जब उत्पादक द्वार से द्वार विक्रय नीति अपनाता है, तो फुटकर व्यापारी नराज होने लगते है। 

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