उप पट्टा क्या है जाने


हेलो दोस्तों।

आज के पोस्ट में हम उप पट्टा के बारे में जानेंगे।


उप पट्टा (Sub-Lease)

कभी कभी पट्टेदार पट्टे पर ली गयी जमीन या खान का कुछ भाग किसी अन्य व्यक्ति को आगे पुनः पट्टे पर दे देता है तो इसे उप पट्टा कहते है।


उदहारण - A ने B से जमीन का एक टुकड़ा कोयला निकालने के लिए पट्टे पर लिया। वह उस जमीन का कुछ भाग C को पुनः पट्टे पर दे देता है। ऐसी दशा में A पट्टेदार है, B भू स्वामी है और C को उप पट्टेदार कहा जाएगा।  A अपने उत्पादन तथा C द्वारा किए गए उत्पादन के जोड़ पर B को अधिकार शुल्क देगा। C के लिए A भू स्वामी होगा और C अपने द्वारा किए गए उत्पादन पर A को अधिकार शुल्क देगा।




Sub-Lease kya hai hindi me jane
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A तथा B के बीच अनुबन्ध की शर्तें पृथक होती है और A तथा C के बीच अनुबन्ध की शर्तें पृथक होती है।


यहां A अपनी पुस्तकों में एक बार पट्टेदार की तरह प्रविष्टियां करेगा और निम्न खाते बनाएगा :

(i) अधिकार शुल्क देय खाता

(ii) भू स्वामी खाता

(iii) अल्पकार्य वसूली खाता




दूसरी बार A अपनी पुस्तकों में भू स्वामी की तरह प्रविष्टियां करेगा और निम्म खाते बनाएगा :

(i) अधिकार शुल्क प्राप्ति खाता

(ii) उप पट्टेदार का खाता

(iii) अधिकार शुल्क संचय खाता


A अपनी पुस्तकों में B को अधिकार शुल्क देने के लिए पृथक विश्लेषण तालिका बनाएगा और C से अधिकार शुल्क प्राप्त करने के लिए भी पृथक विश्लेषण तालिका बनाएगा।


A अपने चिट्ठे में Shortworkings Recoverable Account के शेष को सम्पत्ति पक्ष में तथा Royalty Reserve Account के शेष को दायित्व पक्ष में दिखाएगा। Royalty Payable A/c व Royalty Receivable A/c को वर्ष के अंत मे लाभ हानि खाते में हस्तांतरित कर दिया जाता है।



तेल के कुओं के सम्बंध में अधिकार शुल्क के लेखे (Accounting Records in Connection with oil wells Royalties)

जब तेल के कुँए का स्वामी कुएँ में से खुद तेल नही निकालता है बल्कि अपना तेल निकालने का अधिकार किसी अन्य पक्ष को दे देता है तो ऐसी दशा में तेल निकालने वाले पक्षकार पट्टेदार कहलायेगा और वह निकाले गए तेल पर प्रति टन की दर से अधिकार शुल्क का भुगतान कुएं के स्वामी को करेगा। लेखांकन की विधि इसमें भी वही है जो खानों के सम्बंध में है।



ईंट बनाने के सम्बंध में अधिकार शुल्क (Royalties in Connection with Brick Making)

भू स्वामी को नजराना दिया जाता - कई बार भू स्वामी पट्टेदार से अधिकार शुल्क के अलावा एकमुश्त राशि प्रारम्भ में ही लेता है जिसे नजराना या सलामी कहते है। इस राशि की अग्रिम अधिकार शुल्क या लीज प्रीमियम भी कहा जाता है। पट्टेदार की पुस्तकों में अलग से इसके लिए एक खाता Nazrana A/c या Advance Royalty A/c के नाम से बनाया जाता है जिसके डेबिट पक्ष में प्रथम वर्ष में ही सम्पूर्ण राशि लिख दी जाती है और इस राशि को पट्टे की अवधि से भाग देकर जो रकम आती है उसे प्रति वर्ष लाभ हानि खाते से अपलिखित कर दिया जाता है। नजराना खाते का हमेशा डेबिट शेष होता है ओर इस खाते के शेष को प्रतिवर्ष स्थिति विवरण के सम्पत्ति पक्ष में दिखाते है। 

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