अधिकार शुल्क खाते और इसके प्रकार के बारे में जाने


हेलो दोस्तों।

आज के पोस्ट में हम अधिकार शुल्क और इसके प्रकारों के बारे में जानेंगे।


अधिकार शुल्क खाते (Royalty Accounts)

जब किसी व्यक्ति को किसी विशेष सम्पत्ति को खुद प्रयोग करने का अधिकार होता है मतलब की उस सम्पत्ति पर उसका स्वामित्व होता है तो अगर वह चाहे तो अपने इस अधिकार को खुद प्रयोग न करके किसी दूसरे व्यक्ति को एक निश्चित समय के लिए और निश्चित प्रतिफल के बदले हस्तांतरित कर सकता है। अपने इस अधिकार को अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित करने के बदले उसे जो राशि या प्रतिफल मिलता रहता है उसे अधिकार शुल्क (Royalty) कहते है।




अधिकार शुल्क खाते और इसके प्रकार के बारे में जाने
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अधिकार शुल्क के प्रकार (Types of Royalties)

अधिकार शुल्क बहुत प्रकार के होते है जो इस प्रकार है :

1. खदान अधिकार शुल्क - खानों कर सम्बन्ध में खान के स्वामी को भू स्वामी या पट्टा देने वाला या पट्टादाता कहते है। और जो व्यक्ति खान में से खनिज पदार्थ निकालने का अधिकार लेता है उसे पट्टा लेने वाला या पट्टेदार कहते है। पट्टेदार खान में से निकाले गए खनिज पदार्थ पर एक निश्चित दर से अधिकार शुल्क खान के स्वामी को देता है।


2. ईंट बनाने के सम्बंध में अधिकार शुल्क - ईंट बनाने वाली फर्म जब जमीन पट्टे पर लेती है तो इस जमीन से निकाली गई मिट्टी पर प्रति धन फुट की दर से अधिकार शुल्क जमीन के स्वामी को देती है।


3. तेल के कुओं के सम्बंध में अधिकार शुल्क - यदि कोई ऐसी जमीन पट्टे पर ली जाती है जिसमे तेल के कुएं है तो कुओं से तेल निकालने वाली फर्म जमीन के स्वामी को निकाले गए तेल पर प्रति टन के हिसाब से अधिकार शुल्क देती है।


4. पेटेंट अधिकार शुल्क - जब किसी व्यक्ति को किसी वस्तु को बनाने व विक्रय करने का विशेषाधिकार को पेटेंट कहा जाता है। ऐसे व्यक्ति को जो इस पेटेंट का स्वामी है पेटेंटी कहते है। अगर वह व्यक्ति इस पेटेंट के प्रयोग का अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को दे देता है तो उसे प्रयोग करने वाला व्यक्ति पेटेंट होल्डर कहलाता है। पेटेंट होल्डर एक निश्चित दर से अधिकार शुल्क पेटेंटी को देता है।


5. कॉपीराइट अधिकार शुल्क - पुस्तक का लेखक पुस्तक का स्वामी होता है। वह इसे छिपाने का अधिकार जिस व्यक्ति को देता है उसे प्रकाशक कहते है। प्रकाशक पुस्तको की बिक्री पर एक निश्चित दर से अधिकार शुल्क का भुगतान लेखक को करता है।


6. मशीनों, गुप्त उपकरणों एवं तकनीकी ज्ञान आदि के सम्बंध में अधिकार शुल्क - जो व्यक्ति इनका प्रयोग करता है वह मशीनों के प्रयोग, गुप्त उपकरणों के प्रयोग या तकनीकी ज्ञान के प्रयोग के आधार पर निर्मित वस्तुओं पर प्रति इकाई के आधार पर एक निश्चित दर से अधिकार शुल्क इनके स्वामी को देता है।




किराया और अधिकार शुल्क में अंतर (Difference between Rent and Royalty)

कुछ व्यक्ति किराया और अधिकार शुल्क को एक ही समझते है, परन्तु इनमें निम्न अंतर है :

1. परिभाषा - किसी मूर्त सम्पत्ति (जैसे भवन, प्लांट आदि) को प्रयोग करने के बदले उसके स्वामी को जो राशि दी जाती है उसे किराया कहते है। जबकि अधिकार शुल्क किसी मूर्त या अमूर्त सम्पत्ति के प्रयोग करने के बदले उसके स्वामी को दिया जाता है।इस प्रकार अधिकार शुल्क को क्षेत्र किराए की अपेक्षा अधिक व्यापक है।


2. भुगतान का आधार - किराए की राशि किसी अवधि के आधार पर भुगतान की जाती है जैसे साप्ताहिक, मासिक, अर्धवार्षिक या वार्षिक आदि। परन्तु अधिकार शुल्क की राशि वस्तु के उपयोग की सीमा पर निर्भर करती है जैसे प्रति टन, प्रति घन फुट या प्रति वस्तु या प्रति बिक्री के आधार पर। 

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