Insolvency of a Partner in Hindi


हेलो दोस्तों।

आज के पोस्ट में हम साझेदार के दिवालिया होने के बारे में जानेंगे।


साझेदार का दिवालिया होना (Insolvency of a Partner)

अगर वसूली खाते द्वारा प्रकट की गई लाभ हानि को साझेदारों के पूंजी खातों में हस्तांतरण करने के बाद किसी साझेदार के पूंजी खाते का डेबिट शेष है और वह साझेदार दिवालिया हों जाता है तो उसके पूंजी खाते द्वारा प्रदर्शित इस कमी को अन्य गैर दिवालिया साझेदारों को सहन करना होगा।




Insolvency of a Partner in Hindi
Insolvency of a Partner in Hindi




प्रश्न यह उठता है कि दिवालिया साझेदार के पूंजी खाते द्वारा प्रदर्शित कमी को अन्य साझेदार किस अनुपात में सहन करेंगे ? गार्नर बनाम मरे के विवाद में दिए गए निर्णय से पहले अन्य साझेदार इस हानि को भी लाभ विभाजन अनुपात में सहन करते थे। परन्तु गार्नर बनाम मरे के विवाद में यह निर्णय हुआ कि किसी साझेदार के दिवालिया घोषित होने से हुई पूंजीगत हानि है अतः इस हानि को अन्य साझेदाद अपने लाभ विभाजन अनुपात में न सहन करके पूंजी के अनुपात में सहन करेंगे।




जब एक साझेदार को छोडकर शेष सभी साझेदार दिवालिया हों

ऐसी दशा में सक्ष्म साझेदार को अन्य सभी दिवालिया साझेदारों की कमी वहन करनी होगी। इसका कारण यह है कि साझेदारों का दायित्व संयुक्त और पृथक तथा असीमित होता है। ऐसी दशा में दिवालिया साझेदारों के पूंजी खाते के शेषों को सक्षम साझेदार के पूंजी खाते में हस्तांतरित कर देते है।




जब सभी साझेदार दिवालिया हो जाते हैं

जब फर्म सम्पत्तियों तथा साझेदारों की निजी सम्पत्तियों से भी फर्म के लेनदारों को पूर्ण भुगतान नही मिल पाता है तो सभी साझेदार दिवालिया माने जाते है। ऐसे प्रश्नों में फर्म की पुस्तकों को बंद करने के लिए निमन प्रक्रिया अपनाई जाती है :-

1. लेनदारों और अन्य बाहय दायित्वों के खातों को वसूली खाते में हस्तांतरित नही किया जाता है बल्कि इनका अलग खाता खोला जाता है। इन्हें किए गए भुगतान को भी वसूली खाते में नही लिखा जाता है।


2. सर्वप्रथम Realisation A/c बनाया जाता है (जिसमे लेनदारों एवं बाहय दायित्वों को नही लिखा जाता)।


3. Realisation A/किसी बनाने के बाद Cash A/c बनाया जाता है। Cash A/c में सम्पत्तियों की वसूली से प्राप्त राशि तथा साझेदारों की व्यक्तिगत सम्पत्तियों से प्राप्त राशि लिखने के बाद Cash A/c के शेष को लेनदारों को दे दिया जाता है अर्थात Cash A/c के शेष को लेनदारों के खाते में डेबिट कर दिया जाता है।


4. इसके बाद Creditors A/c एवं बाहय दायित्वों के न चुकाए गए शेष को एक नए खोले गए न्यूनता खाते (Deficiency A/c के क्रेडिट पक्ष में हस्तांतरित कर दिया जाता है।


5. इसके बाद साझेदारों के पूंजी खातों के डेबिट या क्रेडिट शेषों को भी न्यूनता खाते में हस्तांतरित कर दिया जाता है जिससे न्यूनता खाते के दोनों पक्षों का योग अपने आप समान हो जाता है। 

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