Proper Selection of International Markets in hindi


हेलो दोस्तों।

इस पोस्ट में हम विदेशी बाजारों के उचित सुझाव के बारे में समझेंगे।


विदेशी बाजारों के उचित सुझाव (Proper Selection of International Markets)

विदेशी बाजारों के उचित सर्वेक्षण करने के बाद निर्माता उस देश का चुनाव कर सकता है जहां उसे निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध हो :




Proper Selection of International Markets
Proper Selection of International Markets




1. जहां प्रतिबन्ध कम से कम हो

2. जहां प्रतियोगिता का उचित सामना किया जा सकता हो

3. जहां राजनीतिक स्थितियां सामान्य हो

4. जहां लागतें कम हो

5. जहां लाभ की संभावना अधिक हो

6. जहां उदारवादी प्रणाली प्रचलित हो आदि।

अन्तराष्ट्रीय बाजारों की पहचान

परन्तु उपर्युक्त वर्णित सुविधाओ के साथ साथ विभिन्न देशों के बाजारों में उपलब्ध बाधाओं का अध्ययन करना भी आवश्यक है जिसका सामना एक निर्यातक को निर्यात करते समय करना पड़ता है। इसलिए एक विपणनकर्ता को कुछ विशेष देशों तथा कुछ विशेष बाजारों के ही चयन करना पड़ता है। बाजारों के विस्तृत अध्ययन के द्वारा ही निर्यातक यह निर्णय ले सकता है कि किन बाजारों को अपनाया जाए तथा किन बाजारों को छोड़ा जाए।




किन बाजारों को छोड़ा जाए (Criteria for Eliminating the Markets)

एक निर्यातकर्ता को उन देशों का चुनाव करना चाहिए जहां व्यापार बढाने की संभावनाएं अधिकाधिक हो तथा उन बाजारों को फिलहाल छोड़ देना चाहिए जिन बाजारों में पहुंचना संस्था के लिए मुश्किल हो। इसके लिए निम्न दिशा निर्देशों का पालन किया जा सकता है :

1. फर्म की तकनीकी क्षमता जिन बाजारों के अनुसार न हो वे बाजार छोड़ देने चाहिए।


2. जिन देशों में संस्था को अपनी वस्तुएं निर्यात करना महंगा पड़ता है तो ऐसे बाजार संस्था के लिए लाभप्रद नही होते।


3. जिन देशों में भारत सरकार द्वारा निर्यात सम्बन्धी प्रतिबन्ध लगाए गए हो उन देशों में निर्यात नही किया जाना चाहिए।


4. कुछ आयातक देश विदेशों से आयात की जाने वाली वस्तुओं पर कुछ प्रतिबन्ध लागते है या विशिष्ट प्रकार की वस्तुओं की मांग करते है, जिन्हें पूरा करने में कठिनाई होती है तो ऐसे देशों को निर्यात नही करना चाहिए।


5. अन्तराष्ट्रीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति होने पर वहां सस्ती वस्तुए बेचना संस्था के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।


6. अगर आयातक की भुगतान प्रणाली अच्छी नही है तो निर्यातक को उन देशों तथा बाजारों में अपनी वस्तुओं का निर्यात नही करना चाहिए।


7. अगर किसी विदेशी बाजार के लिए वस्तु में संशोधन या परिवर्तन करना जरूरी है लेकिन उसके लिए पर्याप्त समय या मशीनरी उपलब्ध नही है तो ऐसे निर्यात को आगे के लिए टाला जा सकता है।


8. कुल प्राचीन वस्तुओं का निर्यात सरकार की ओर से मना होता है। उनका निर्यात किसी भी स्थिति में नही किया जा सकता।


9. जिन देशों में आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क अधिक हो वहां अपनी वस्तुए भेजना निर्यातक के लिए लाभप्रद नही होता।




भारतीय निर्यातकों के लिए निर्यात सूचनाएं प्राप्त करने के स्त्रोत

भारतीय निर्यातकों को निर्यात सूचनाएं निम्नलिखित स्त्रोतों से प्राप्त हो सकती है :

1. आयात निर्यात बैंक

2. विदेशी दूतावासों के सूचना केंद्र

3. निर्यात साख एवं गारन्टी निगम

4. भारतीय विदेशी व्यापार संस्थान

5. भारतीय रिजर्व बैंक

6. व्यापारिक बैंक

7. निर्यात संवर्द्धन परिषदें

8. विश्व व्यापार संघ द्वारा प्रकाशित पत्रिकाएं एवं सूचनाएं इत्यादि।


उपर्युक्त जानकारी प्राप्त करने के बाद ही निर्यातकों को अपनी वस्तुएं बाजार में बेचने के लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनानी चाहिए। 

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